हड़प्पा सभ्यता में मनकों के निर्माण में कौन-कौन से पदार्थों का उपयोग किया जाता था?

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हड़प्पा सभ्यता में मनकों के निर्माण में कालियन, जैस्पर, स्फटिक, क्वार्ट्ज तथा सेलखड़ी जैसे पत्थर; ताँबा, काँसा तथा सोने जैसी धातुएँ तथा शंख, फयॉन्स और पकी मिट्टी जैसे पदार्थो का प्रयोग किया जाता था?

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हड़प्पा सभ्यता की कौन-सी बस्ती लगभग पूरी तरह से शिल्प-उत्पादन में संलग्न थी?

उत्तर- हड़प्पा सभ्यता की चन्हूदडों नामक बस्ती लगभग पूरी तरह से शिल्प-उत्पादन में संलग्न थी? प्रश्न 15.आहार संबंधी आदतों को जानने के लिए पुरातत्वविद किन साक्ष्यों का इस्तेमाल करते हैं?

हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, कालीबंगा, चन्हूदडों तथा अन्य स्थानों के उत्खनन में गेहूँ, जो आदि अनाज के जो दाने मिले हैं, उनसे हड़प्पा सभ्यता के निवासियों की आहार संबंधी जानकारी प्राप्त होती है।

दूसरी ओर खुदाई में प्राप्त मुहरों पर बकरी, गाय, भैंस, आदि के जो चित्र मिले हैं उनसे पुरातत्ववेताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि इस सभ्यता के लोग अपने आहार में दूध और दूध से बनी वस्तुओं का प्रयोग करते थे। पुरातत्ववेताओं को हड़प्पावासियों द्वारा आखेट किए जाने के भी साक्ष्य मिले हैं, इससे यह ज्ञात होता है कि यहाँ के लोग माँस तथा मछली का भी भोजन में प्रयोग करते थे।

कौन-से वास्तुकला संबंधी लक्षण नियोजन की ओर संकेत करते हैं?

मोहनजोदड़ों नगर के उत्खनन में जो खण्डहर मिले हैं, वे सिंधु घाटी सभ्यता की सुनियोजित नगर-नियोजन प्रणाली की ओर संकेत करते है। नगर में अनेक सड़कें थी जो एकदूसरे को समकोण पर काटती थी और नगर को अनेक आयताकार खण्डों में विभाजित करती थी।

भवनों का निर्माण और इनमें आवास, दुर्ग, स्नानागार, अन्नागार, जल निकास प्रणाली पकी हुई ईंटों का प्रयोग, दो मंजिला भवन, उनमें ऊपरी मंजिल पर जाने हेतु सीढ़ियाँ, कुएँ, खिड़कियाँ प्रवेशद्वार आदि सुनियोजित नगर नियोजन प्रणाली की ओर संकेत करते हैं।

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