यह बीसवीं शताब्दी के एक सुविख्यात अभिलेखशास्त्री डॉ. डी. सी. सरकार का वक्तव्य है-“भारतीयों के जीवन, संस्कृति और गतिविधियों का ऐसा कोई पक्ष नहीं है, जिनका प्रतिबिम्ब अभिलेखों में नहीं है।”

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यह बीसवीं शताब्दी के एक सुविख्यात अभिलेखशास्त्री डी.सी.सरकार का वक्तव्य है-“भारतीयों के जीवन, संस्कृति और गतिविधियों का ऐसा कोई पक्ष नहीं है, जिनका प्रतिबिम्ब अभिलेखों में नहीं है।” चर्चा

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डॉ. डी. सी. सरकार बीसवीं शताब्दी के महान ,

भारतीय अभिलेखशास्त्री थे। उनका कहना है कि भारतीय । i| संस्कृति, जीवन तथा गतिविधियों का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, 1| जिसका विवरण अभिलेखों में नहीं है। इनका संक्षिप्त विवरण

निम्न प्रकार है

घटनाओं की जानकारी- ऐतिहासिक अनेक घटनाओं की जानकारी मिलती हमें शिलालेखों से होती है। उदाहरण के लिए हरिषेण द्वारा लिखित प्रयाग प्रशस्ति से समुद्रगुप्त के काल की घटनाओं की जानकारी प्राप्त होती है। उसी प्रकार कलिंग के अभिलेखों तथा अन्य अभिलेखों में कलिंग युद्ध, प्रशासन सिद्धान्त आदि की जानकारी होती है। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, पुलकेशिन द्वितीय, राजाभोज, आदि राजाओं के समय की ऐतिहासिक घटनाओं की बहुत अधिक जानकारी अभिलेखों से प्राप्त होती है।

2. काल-गणना- अभिलेखों ने इतिहासकारों की काल गणना करने में सहायता की है। युद्ध काल, ऐतिहासिक तिथियों का निर्धारण अभिलेखों के आधार पर ही किया गया है।

3. भाषा तथा लिपि का ज्ञान- अभिलेख जिस भाषा तथा लिपि में लिखे गये हैं, उनसे पता चलता है कि उस काल में कौन-सी भाषा तथा लिपि का प्रचलन था। उदाहरण के लिए अशोक के अभिलेख प्राकृत भाषा में है, ब्राह्मी तथा खरोष्ठी लिपि का प्रयोग किया गया उस काल में प्राकृत भाषा आम बोल-चाल की भाषा थी।

4. राजाओं की नामावली- अखिलेखों से ही हमको राजाओं किसी स्रोत से राजाओं के नामों की जानकारी होती है अन्य की जानकारी नहीं होती है। अभिलेखों से ही यह ज्ञात हुआ कि अशोक के लिए ‘देवनाम प्रिय’ तथा ‘प्रियदर्शी’ आदि

राजाओं के शासन क्षेत्र का निर्धारण- अभिलेखों से ही राजाओं के राज्य विस्तार एवं शासन क्षेत्र का पता चलता है। जिस क्षेत्र में जिस राजा का अभिलेख मिला है, उससे यह स्पष्ट होता है कि वहाँ उसी राजा का शासन था। राजा अपने शासन सीमाओं में ही स्तम्भ लगाते थे।

6. भू-व्यवस्था तथा प्रशासन का ज्ञान- अभिलेखों से हमें स बात की जानकारी मिलती है कि राजा तथा सामन्त भूमिदान किया करते थे तथा भूमि की व्यवस्था क्या थी, प्रशासन की व्यवस्था क्या थी? इसकी जानकारी अभिलेखों से प्राप्त होती है। जो अभिलेख मिले हैं, उनमें से अधिकतर अभिलेख ताम्र पत्रों पर लिखे हुए हैं, जो प्राचीन काल की सभी भाषाओं में है। इनसे मन्दिरों, ब्राह्मणों, भिक्षुओं, विहारों, अधिकारियों आदि की जानकारी मिलती है

7. सामाजिक स्थिति का ज्ञान- अभिलेखों से उस काल की सामाजिक स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। उस समाज में कितने सामाजिक वर्ग थे, उनकी स्थिति क्या थी समाज में अनेक वर्ग थे; जैसे- कृषक, व्यापारी, बुस्कर, सुनार, लोहार, धोबी आदि। इनका विवरण अभिलेखों से प्राप्त होता है। उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि अभिलेख भारतीय जीवन, संस्कृति तथा गतिविधि के प्रतिबिम्ब थे।

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