पेट को स्वस्थ कैसे रखें || पेट को स्वस्थ रखने के आयुर्वेदिक उपचार

पेट को स्वस्थ रखने के आयुर्वेदिक उपचार

पेट को स्वस्थ रखने के आयुर्वेदिक उपचार:- बहुत वर्षों के रिसर्च के बाद यह साबित हुआ है आयुर्वेद ने जिसको हमेशा बताया है और सही बताया है आयुर्वेद ने हमेशा कहा है कि स्वास्थ्य की शुरुआत पेट से होती है हमारा स्वास्थ्य पेट की सभी बीमारियों को हमारे शरीर से दूर रखता है हमारा पेट अस्वस्थ होता है तो हम कई प्रकार की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं

पेट को सदैव स्वस्थ रखना चाहिए पेट को स्वस्थ रखने के लिए सही खानपान का सेवन करना होता है जिससे हमारा शरीर बिल्कुल स्वस्थ रहता है

हमें हमारे शरीर में सभी फायदेमंद बैक्टीरिया को साथ रखना होता है और सभी नुकसानदायक बैक्टीरिया को दूर रखना होता है जिससे हमारा पेट स्वस्थ बना रहे शरीर में नुकसान दायक बैक्टीरिया कहीं कारणों से उत्पन्न होते हैं जैसे जंक फूड का सेवन करना, प्रदूषण के कारण, गलत पदार्थों का सेवन करना और गलत जीवनशैली से भी ये अपनी जगह बना लेते हैं पेट को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा उपाय है मसालो का सेवन करना।

वाले सभी दूसरे बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायता करते हैं।

हमें उन सभी मसालों को अपने खानपान की जीवन शैली में लाना चाहिए। सेवन करने से हमारा पेट और शरीर स्वस्थ रहता है। वे मसाले इस प्रकार हैं जैसे: जावित्री, लौंग, जायफल, इलायची, तुलसी, हल्दी, और अन्य आदि

पेट को स्वस्थ रखने के आयुर्वेदिक उपचार:-

जावित्री:

जावित्री क्या होती है सभी जानते हैं। कुछ लोग इसे जायफल का ही दूसरा रूप मानते हैं। परंतु जायफल अलग है और जावित्री अलग है। जावित्री में भी जायफल की भांति अनेकों गुण है। जिनके बारे में हम आपको बताते हैं जावित्री अनेक बीमारियों से लड़ने में सहायक होती है।

जावित्री तथा जायफल दोनों मायरिस्टिका फ्रेगरैंस (Myristica fragrans) नाम से पेड़ पर पायी जाती हैं।

सर लोग जावित्री और जायफल को एक ही समझ लेते हैं परंतु ऐसा नहीं है जायफल इस पेड़ का बीज होता है और जो इस रिश्तेदार परत को ढक कर रखती है उसे जावित्री कहा जाता है। वैज्ञानिक नाम मायरिस्टिका फ्रेगरैंस है और इसका अंग्रेजी नाम मेस (Mace) है। सामान्य भाषा में इसे जावित्री के नाम से ही जाना जाता है।

अन्य मसालों की भांति है मसाला भी सभी घरों की रसोई में प्रयोग में लाया जाता है। यह नारंगी और हल्के पीले रंग की होती है।

यह खाने का भी स्वाद बढ़ाती है। कई पूर्व वर्षों से इसका औषधि के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

लौंग:- || पेट को स्वस्थ रखने के आयुर्वेदिक उपचार

लौंग एक वनस्पति है। लौंग में एक खास प्रकार का स्वाद पाया जाता है जो यूजिनॉल तत्त्व की वजह से आता है। यह तत्व इसमें एक गंध को उत्पन्न करता है। लौंग सभी मौसम में आती है और यह सभी के लिए फायदेमंद होती है, हालांकि चाहे वह बच्चा हो या बुढ़ा व्यक्ति।

लौंग सर्दी के मौसम में अत्यधिक प्रयोग होती है वह इसलिए क्योंकि इसकी ताहसीर अत्यधिक गर्म होती है। इसको सावधानी से प्रयोग करना चाहिए। अगर कभी दांतों में दर्द हो तो लौंग का इस्तेमाल करने से दांतों में बहुत आराम मिलता है। सभी टूथपेस्ट में लौंग की मात्रा पाई जाती है।

जायफल:

जायफल का प्रयोग भी अन्य मसालों की भांति किया जाता है इसके प्रयोग से खाना अधिक स्वादिष्ट बन जाता है। इसका प्रयोग तेल में मिलाकर बच्चों की मालिश करने में भी किया जाता है।

ज्यादातर लोग जायफल के गुणों को नहीं जानते, आयुर्वेद में जायफल को विस्तारपूर्वक बताया गया है आईये उन सभी के बारे में जानते हैं। रोगी जायफल का इस्तेमाल करके अपनी बीमारी का रोकथाम कर सकता है। बहुत सी बीमारी में जायफल का बहुत बड़ा योगदान है।

जायफल बच्चों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। जायफल मुंह के छालों को सही करने में भी कारगर साबित होता है। थोड़े पानी में जायफल का रस मिलाकर उससे कुल्ले करने चाहिए मुंह के छाले सही हो जाते हैं।

जायफल का प्रयोग आप अपने चेहरे पर भी कर सकते हैं। आप जायफल का चूर्ण बनाकर पानी में घोलकर उसे मुंह पर लगा सकते हैं, उससे मुंह की सभी झाईयां हट जाती हैं।

इलायची:

इलायची को सभी जानते हैं सभी के घरों में इलायची का प्रयोग होता है। एक छोटी सी इलायची के अनेकों फायदे हैं। इलायची में बहुत प्रकार के औषधीय गुण होते हैं। जो हमारे शरीर को बहुत ही बड़ी बड़ी बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं।

जहां तक है इलायची दो प्रकार की होती है पहली हरी इलायची अौर दूसरी काली इलायची। हरी इलायची का प्रयोग ज्यादातर मिठाइयों व पूजा पाठ में होता है तथा काली मोटी इलायची का अत्यधिक प्रयोग मसालों में होता है। भारत में इलायची का प्रयोग पेट दर्द की दवा तथा अन्य दवाओं में होता है।

जब किसी व्यक्ति को गैस या एसिडिटी बनती है तो उसे एक इलायची देने से उसकी समस्या का हल हो जाता है। हमें हमेशा इलायची का सेवन खाना खाने के पशचातृ् करना चाहिए।

वैज्ञानिकों का मानना है कि लाइकिंग में मैग्नीशियम और पोटेशियम की अत्यधिक मात्रा पाई जाती है इससे है शरीर की ब्लड सरकुलेशन मात्रा को स्थिर बनाए रखता है तथा जिस व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या होती है उसका ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में सहायता करती है। यह सांस की बीमारी वाले व्यक्तियों को भी फायदा प्रदान करती है।

तुलसी: 

तुलसी को हिंदू धर्म में महालक्ष्मी का ही एक रूप माना गया है जिन्हें लोग घरों के आंगन में लगाकर उनकी पूजा करते हैं। हिंदू धर्म में तुलसी मां के नाम से पुकारा जाता है। कुछ व्यक्ति प्रति दिन तुलसी का सेवन औषधि मानकर करते हैं।

लगभग है सभी के घरों में पाई जाती है। इसका उपयोग वैज्ञानिक तथा भी आयुर्वेद उपयुक्त मानते हैं।

इससे कई प्रकार की दवाई बनती है जैसे:- एंटीबायोटिक, एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीफ्लू तथा अन्य आदि। इसका सेवन करने से हीमोग्लोबिन मैं बढ़ोतरी होती है।

तुलसी का प्रयोग प्रतिदिन करने से पेट की बीमारियां दूर रहती हैं।

इसका प्रयोग खांसी तथा जुखाम में भी किया जाता है, बाल झड़ने वाली समस्याओं में भी तुलसी का प्रयोग किया जा सकता है।

शरीर के वजन को कम करने के लिए भी तुलसी का प्रयोग किया जाता है। तुलसी एक रामबाण औषधि है, इसका प्रयोग सही स्तर पर होता है।

हल्दी:- पेट को स्वस्थ रखने के आयुर्वेदिक उपचार 

हल्दी को सभी जानते हैं भारत में हल्दी का प्रयोग कई वर्षों से किया जा रहा है इसे जमीन में से निकाला जाता है फिर इसे उबालकर सुखाकर उसके बाद इसे पीसकर पाउडर बनाया जाता है।

यह आयुर्वेदिक तथा हर्बल दवाइयों में भी बहुत कारगर साबित होती है यह कई प्रकार की बीमारियों को जड़ से खत्म करने में काम करती है। सांस की बीमारी को सही करने के लिए हल्दी का कई दवाइयों में प्रयोग होता है।

इसका स्वाद एकदम कड़वा होता है तथा यह किसी भी प्रकार के व्यंजन को रंग देने में भी काम आती है। हल्दी एक एंटीबायोटिक पदार्थ है। इसका प्रयोग सभी जगह होता है हल्दी लीवर को भी फायदा करती है। हल्दी एक महत्वपूर्ण औषधि है।

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