अन्य पिछड़े वर्ग, उनसे सम्बन्धित मुद्दे निम्नवत् क्या है ?

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जातियों का एक बड़ा समूह जिन्हें नीचा समझा जाता था। उनके साथ तरह-तरह के भेदभाव किये जाते थे। ये सेवा करने वाले शिल्पी (कारीगर) जातियों के लोग थे जिन्हें जाति-सोपान में नीचा स्थान प्राप्त था।

अन्य पिछड़े वर्ग, उनसे सम्बन्धित मुद्दे निम्नवत् क्या है ?

लेकिन भारतीय संविधान में यह स्वीकार किया गया है कि अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों के अलावा और भी कई समूह हैं जो सामाजिक असुविधाओं से पीड़ित हैं। ऐसे समूह का जाति पर आधारित होना जरूरी नहीं है। लेकिन वे आमतौर पर सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हैं, जिन्हें अन्य पिछड़े वर्ग के नाम से जाना जाता है। पिछड़ेपन की चार कसौटियों पर इन्हें पिछड़े वर्ग में शामिल किया गया

(1) जातीय संस्तरण में निम्न स्थान, (2) शिक्षा का अभाव, (3) सरकारी नौकरियों में कम प्रतिनिधित्व, तथा (4) व्यापार व उद्योगों में कम प्रतिनिधित्व।

आज आदिवासियों से सम्बन्धित बड़े मुद्दे कौन से हैं?

जनजातियाँ या आदिवासी हमारे समाज, सभ्यता तथा संस्कृति से दूर रहती हैं जिस कारण उनसे सम्बन्धित मुद्दे अलग प्रकृति के हैं।

उनसे सम्बन्धित मुद्दे निम्नवत् हैं

जनजातियों का शोषण-अंग्रेजों के शासन के समय कबायली लोग हमारे समाज के सम्पर्क में आना शुरू हुए। ये आदिवासी अपनी ही संस्कृति में रहते हैं, किसी और में हस्तक्षेप नहीं करते।

अंग्रेजी शासन व्यवस्था में अंग्रेजों ने डाक तार की तारें बिछाने का कार्य शुरू किया तो वो इलाके आदिवासियों के थे जिसका आदिवासियों ने हिंसात्मक विरोध किया। इससे नाराज होकर अंग्रेजों ने साहूकारों तथा जमींदारों को कबायली लोगों का शोषण करने के लिए प्रेरित किया। इससे इन लोगों का जीवन-स्तर निम्न हो गया। उन्हें उनके स्थानों से अलग कर दिया गया।

(2) निर्धनता-आदिवासी लोग हमारी सभ्यता से दूर पहाड़ों, जंगलों, घाटियों इत्यादि में रहते हैं। इन लोगों का कोई वर्ग नहीं होता। यह साधारण जीवन व्यतीत करते हैं। परन्तु हमारे समाज के सम्पर्क में आने से लोगों ने इनका शोषण किया और यह निर्धन से और निर्धन हो गए। (3) अलग-थलग करने की नीति-अंग्रेजों ने प्रशासनिक कारणों से उन्हें अलग-थलग करने की नीति अपनाई जिससे वह समाज में पिछड़ते ही चले गए।

(4) मध्यस्थ रास्ता-स्वतन्त्रता के बाद संविधान ने सभी नागरिकों तथा समूहों की प्रगति का निर्देश सरकार को दिया इसलिए उनके क्षेत्र में न केवल प्रगति के अवसर उत्पन्न किए बल्कि उनकी संस्कृति का भी ध्यान रखा गया। परन्तु ये परम्परागत कार्यों से दूर होने के कारण सामाजिक सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाए हैं।

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